ईश्वर-वन्दना-शायरी(कविता) नज़्में -नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi 

ईश्वर-वन्दना-शायरी(कविता) नज़्में -नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

इलाही तू फ़य्याज़ और करीम
इलाही तू ग़फ़्फ़ार है और रहीम
मुकद्दस, मुअल्ला, मुनज़्ज़ा, अज़ीम
न तेरा शरीक और न तेरा सहीम
तेरी ज़ाते-बाला है सबसे क़दीम

तेरे हुस्ने-कुदरत ने या किर्दगार !
किये हैं जहां में वो नक़्शो-निगार
पहुंचती नहीं अक़्ल उन्हें ज़र्रा-वार
तहय्युर में हैं देखकर बार-बार
हैं जितने जहां में ज़हीनो-फ़हीम

ज़मी पर समावात गर्दां किये
नजूम उनमें क्या-क्या दरख़्शां किये
नबातात बेहद नुमायां किये
अयां बहर से दुर्रो-मरजां किये
हजर से जवाहर भी और ज़र्रो-सीम

शिगुफ़्ता किये गुल-ब-फ़स्ले-बहार
अनादिल भी और कुमरी-ओ-कब्कसार
बरो-बरगो-नख़्लो-शजर शाख़सार
तरावत से ख़ुशबू से हंगाम-कार
रवां की सबा हर तरफ़ और नसीम

बयां कब हो ख़िलकत की अनवाअ का
जो कुछ हस्र होते तो जावे कहा
खुसूसन बनी-आदमे-ख़ुश-लक़ा
शरफ़ उन सभी में इन्हीं को दिया
ये इस्लाम-ओ-ईमानो-दीने-क़दीम

अता की इन्हें दौलते-माअरिफ़त
इबादत इताअत निको-मंज़िलत
हया, हुस्नो-उल्फ़त, अदब, मस्लहत
तमीज़ो-सुख़न खुल्क ख़ुश-मक़मत
फ़रावां दिये और नाज़ो-नईम

तेरा शुक्रे-अहसां हो किससे अदा
हमें मेह्र से तूने पैदा किया
किये और अल्ताफ़ बे-इंतहा
”नज़ीर” इस सिवा क्या कहे सर झुका
ये सब तेरे इकराम हैं, या करीम ।

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