इहु मनूआ द्रिड़ु करि रखीऐ-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

इहु मनूआ द्रिड़ु करि रखीऐ-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

इहु मनूआ द्रिड़ु करि रखीऐ गुरमुखि लाईऐ चितु ॥
किउ सासि गिरासि विसारीऐ बहदिआ उठदिआ नित ॥
मरण जीवण की चिंता गई इहु जीअड़ा हरि प्रभ वसि ॥
जिउ भावै तिउ रखु तू जन नानक नामु बखसि ॥1॥314॥

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