इश्क़ वाली शायरी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

इश्क़ वाली शायरी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

इश्क़ का दौर था तब भी,
इश्क़ का दौर है अब भी ।
कसक कुछ और थी तब भी,
दिल का शौर है अब भी ।
मैं चाहत को नगमो में सुना देता
मगर सुन ले…
किस्सा जो तुम्हारा था
वो पुरा हो नही पाया ।।

जग जाहिर हुआ जो दर्द
दीवाने है कहलाये ।
जला कर खुद की हस्ती को
परवाने है कहलाये ।
लिखा करते थे तुमको यूं
अधुरे से लफ्जो मे…
जुडे जो लफ्ज हक़िक़त मे
तो अफसाने है कहलाये ।।

बुझी थी जो शमां एक शाम
उसे फिर से जलाना है ।
पडी थी बन्द जो धड़कन
उसे फिर से चलाना है ।
अधुरे है बरसो से किस्से
जो ये चाहत के…
लिखना है वो नज़मो मे
गजलो में सुनाना है।।

कभी यादो में आऊँ तो
लफ्जो से भुला देना ।
दर्द बनकर सताऊ तो
अश्को से छुपा लेना ।
उठे जो फिर कभी सैलाब
मेरी मोहब्बत के…
पराये हो गये हो तुम
दिल को ये बता देना ।।

माना था मुझे अपना
पराये हम अब कैसे।
जुदा था जो तेरा सपना
सजाये संग तब कैसे ।।
मेरी पूजा,मेरा विश्वास,
मेरी आरजू थी तुम..
तो जुदा क्यू इश्क़ है तेरा
अलग तेरा रब कैसे ।।

जीवन कुछ नही है बस
सांसो की उधारी है ।
बिना प्रीतम के जीना तो
मरने से भी भारी है ।
अदाये ये दे दे अब तुम्हारी
भी स्वीकृति…
तो जीवन हो मेरा अपना
नही संघर्ष तो जारी है ।।

तेरी चूडि, तेरी पायल, तेरे
काजल से बात करता हूं ।
तेरी बातो, तेरी यादो, तेरे
आंचल में रात करता हूं ।
तुझे भी हो गया हो इश्क़
मेरी मोहब्बत से…
तो जमाने को बता दूंगा
मैं तुझसे प्यार करता हूं ।।

जुदाई जो एक रिश्ता है
जुदाई की भी रश्मे है ।
इसमे टूटे है सब वादे
अधुरी सी कसमे है ।
मोहब्बत के परिंदे ही निभाते है
इन रिश्तो को..
ना उनका दिल उनका है
ना उनका दर्द बस में है ।।

ये घायल है, बेचारा है
पर दिल मेरा तुम्हारा है ।
तेरी चाहत में पागल है
तेरी नजरो का मारा है ।
बिजलियां इन अदाओ की
तुम रोक लेना बस…
दीवानो की कतारो मे
जमाना भी तो सारा है ।।

मैं कश्ती हूँ जो कोई
तू मेरा किनारा है ।
मैं हस्ती हूँ गिरती तो
तू मेरा सहारा है ।
सम्भाला है, संवारा है
तुमने ही बनाया है
जो कुछ भी तो मेरा है
वो सब कुछ तुम्हारा है ।।

महक ए इश्क़ अब भी
हवा के झोके लाते है ।
तुम्हे छूकर जो आते है
मुझ तक वो समाते है ।
तुमने छोड़ा था जिसको
छेड़कर प्रेम में अधुरीत ।
दीवाने संग मेरे अब
वही धुन गुनगुनाते है ।।

मोहब्बत, इश्क़ और चाहत
लबों पर जब जब आयेगा ।
तेरी हसरत, कमी तेरी
तेरा ही नाम सुनाएगा।
लिखी थी जो भी तेरे साथ
तेरे बाद की सांसे…
वो “अधुरी दास्ताँ” मेरे साथ
जमाना आज गायेगा ।।

चमकता चान्द हो जो तुम
मैं नन्हा सा तारा हूँ ।
फलक का सुर्य हो जो तुम
मैं दीपक सा सारा हूँ ।
अन्धेरी रात को रोशन बना
देने की है कोशिश
किसी की राह का साथी हूँ
किसी का मैं सहारा हूँ ।।

मोहब्बत कुछ नही है बस
अधुरी एक कहानी है ।
जहां अश्को से भीगे लब्ज
दिल का दर्द रूहानी है ।
यहाँ हर दर्द हुआ बदनाम
खुदगर्ज जमाने मे…
यहाँ हर घर में मजनू है
हर लैला दीवानी है ।।

राधा सा अधूरा है
मीरा सा वो पागल है ।
गीतासार सा पुरा है
गंगा सा वो निर्मल है ।
बस तुम जान लो मेरे प्रेम
की वो परिभाषा
तुलसी सा वो पावन है
कान्हा सा वो चंचल है ।।

मैं अपने गीत गजलो से तुम्हे
पैगाम करता हूँ ।
तुम्हारी याद में लिखकर मै
सुबह ओ शाम करता हूँ ।
मैं गाता हूँ, मैं लिखता हूँ, भटकता
हूँ मोहब्बत मे
और दुनिया ये समझती है कि
मैं भी काम करता हूँ ।।

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