इश्क़ का चान्द-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

इश्क़ का चान्द-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

क्यूं इश्क़ का चान्द आज मजबूर है
क्यूं चाहत की चांदनी आज बहुत दूर है ।

अमावस की रात के भी कई दिन हैं बाकी
अभी तो पूनम रात हुई कैसे भूला है साकी
काली बदली का रुख भी नहीं दूर दूर है
क्यूं इश्क़ का चान्द आज मजबूर है ।।

कैसी बन्दिश के अंधियारों ने घेरा है
कैसे ग्रहण का उसकी आभा पर डेरा है
क्यूं तारे भी आज खुद की चमक में मगरूर हैं ।
क्यूं इश्क़ का चान्द आज मजबूर है ।।

कैसे चकोर अपने साथी को प्रेम समझाएगा ।
कैसे कोई प्रेमी तुमको अपनी प्रेयशी बतलायेगा ।
तेरी चांदनी से ही तो तू इतना मशहूर है ।
फिर क्यूं इश्क़ का चान्द आज मजबूर है ।
क्यूं चाहत की चांदनी आज बहुत दूर है ।।

Leave a Reply