इश्क के कूचे में यूं- शायरी-कृष्ण बेताब -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Krishan Betab

इश्क के कूचे में यूं- शायरी-कृष्ण बेताब -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Krishan Betab

इश्क के कूचे में यूं सूरत कभी ऐसी न थी
ग़म कभी ऐसा न था राहत कभी ऐसी न थी

थी तो थी मुझसे लगावट कुछ तो हर अन्दाज में
आप को मुझसे मगर नफ़रत कभी ऐसी न थी

कारगर पहले भी था कुछ कुछ जनूं का सिलसिला
सर में यूं सौदा न था वहशत कभी ऐसी न थी

थी बराए नाम उनकी याद मेरे जिहन में
कोई आलम था मगर चाहत कभी ऐसी न थी

दिल-ए-बेताब कदर-ए-हौसला भी चाहिए
इश्क के हाथों तेरी हालत कभी ऐसी न थी

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