इरशाद हो तो सब को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इरशाद हो तो सब को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इरशाद हो तो सब को अकेला भगा के आऊं ।
अजमेर चन्द आन में कैदी बना के आऊं ।
बाज़ीद ख़ां का सर भी अभी जा के मैं उड़ाऊं ।
इक सिंह एक लाख पि ग़ालिब हुआ दिखाऊं ।
शाबाश कह के सतिगुरू फ़ौरन खड़े हुए ।
ज़ुरअत पि पहरेदार की ख़ुश बड़े हुए ।

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