इतने में मुख़ातिब हुए-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इतने में मुख़ातिब हुए-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इतने में मुख़ातिब हुए सतिगुर गुरू गोबिन्द ।
वुह साबिर-ओ-शाकिर वुह बहादुर गुरू गोबिन्द ।
रसते में गंवा आए थे दो दुर गुरू गोबिन्द ।
थे ग़म की जगह शांती से पुर गुरू गोबिन्द ।
फ़रमाए वुह सब से नहीं मौका येह ग़ज़ब का ।
पूरा यहीं कल होगा, इरादा मेरे रब का ।

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