इतना भी क्‍या कम है प्यारे-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

इतना भी क्‍या कम है प्यारे-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

लाशों को झकझोर रहे हैं
मुर्दों की मालिश करते हैं
…ये भी उन्हें वोट डालेंगी !
मत पत्रों की आँख मिचोली
सबको ही अच्छी लगती है
फिर भी सच है
किस्मत उनकी ही जगती है
जैसे-तैसे जीतेंगे जो
जैसे-तैसे ज्यादा-ज्यादा मतपत्रों को
खीचेंगे जो, जीतेंगे वो
हाँ, हाँ, वो ही जीतेंगे
जी हाँ, वो ही जीतेंगे !
लाशें भी खुश खुश दीखेंगी
मुर्दे भी खुश खुश दीखेंगे
उनकी ही सरकार बनेगी
श्रमिक जनों का खेतिहरों का
छात्र वर्ग का, लिपिक वर्ग का
गिरिजन का भी, हरिजन का भी
आम जनों का
लहू चूसने की तरकीबें
नई नई ईजाद करेगी
निर्मम होकर कतल करेगी
जो भी चूँ बोलेगा, उसकी

जो भी अब सरकार बनेगी
सेठों को ही सुख पहुँचाएगी
पाँच साल फिर मौज करेंगे
लोक सभाई-लोक सभाई-लोक सभाई
सांसद-फांसद, M.L.A. गण, M.L.C. गण
पाँच साल फिर मौज करेंगे
यूँ ही बस भत्ता मारेंगे
नौकरशाही की छाया में
सुविधा भोगी बौद्धिक जनों की
उसको ही आशीष मिलेगी
धर्म धुरंधर पंडित-मुल्ला
टिकड़मजीवी ग्रंथ कीट विधा व्यवसायी
कवि-साहित्यिक, पत्रकार, तकनीक-विशारद
सबकी ही आशीष मिलेंगी
नवसत्ता, अभिनव सत्ता को
सबकी ही आशीष बटोरेगी
फिर से सरकार

मुझ-जैसे पागल दस-पाँच
उस सत्ता को पहुँचाएँगे क्या रत्ती भर भी आँच ?
मुझ जैसे पागल दस-पाँच !
कैसी भी सरकार बने तो
उसका हम क्या कर लेंगे ?
क्या कर लेंगे, हाँ जी, उसका !
कुत्तों जैसे भौंक-भौंककर –
उसकी नींद हराम करेंगे ?
हाँ जी, हाँ जी, हाँ जी, हाँ जी !
इतना तो कर ही सकते हैं…
इतना तो कर ही सकते है…
यह भी तो काफी है प्यारे !
इतना भी क्या कम है प्यारे ?

मत-पत्रों की लीला देखो
भाषण के बेसन घुलते हैं
प्यारे इसका पापड़ देखो,
प्यारे इसका चीला देखो
चक्खो, चक्खो पापड़ चक्खो
गाली-गुफ्ता झापड़ चक्खो
मतपत्रों की लीला चक्खो
भाषण के बेसन का, प्यारे, चीला चक्खो…

लाशों को झकझोर रहे हैं
मुर्दों की मालिश करते हैं
निर्वाचन के जादूगर हैं
राजनीति के मायाधर हैं
इनकी जयजयकार मनाओ
इनकी ही सरकार बनाओ
पीछे देखा जाएगा जी
आएगा जो, आएगा जी
भुगतें वैसी, करनी इनकी होगी जैसी
नहीं, नहीं, सो क्योंकर होगा ?
नहीं, नहीं, सो क्योंकर होगा ?
नहीं, नहीं, सो क्योंकर होगा ?
फिर क्या होगा !
फिर क्‍या होगा !
फिर क्या होगा !
9.11.79

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