इतना भी काफी है !-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

इतना भी काफी है !-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

बोल थे नेह-पगे बोल,
यह भी बहुत है ! इतना भी काफी है !
औचक ही आँख गए खोल,
यह भी बहुत है ! इतना भी बहुत है !
गाहक थे, पता चला मोल,
यह भी बहुत है ! इतना भी बहुत है !
अचल था तन, मन गया डोल,
यह भी बहुत है ! इतना भी काफी है !
लौटे हो, लगी नहीं झोल,
यह भी बहुत है ! इतना भी काफी है !

2.2.80

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