इजहार की वो कहानी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

इजहार की वो कहानी-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

इजहार…
तरस रहे थे दोनों दिल
बस इजहार बाकी था ।
बयां हो जाये लबों से
ये इन्तजार बाकी था ।
तुमने कैसे उस पल
सब कुछ जता दिया ।
हां इश्क़ है तुमको भी
दिल को बता दिया ।
कुछ लफ़्जों से तुमने
सब अपना बना लिया ।
कुछ सांसों ने तेरी
मुझको भी फना किया ।
मेरी खामोशी ने शायद
तुमको रुला दिया ।
पर तुम्हारे उन अश्कों ने
मुझको हिला दिया ।
चीख कर मैं भी
चाहत सुना देता ।
हां मोहब्बत है तुमसे
सबको बता देता ।
मैं भी तो गहरी सी ‘हाँ’
बता चुका था ।
मेरे दिल की रजा तुझसे
मैं जता चुका था ।
लग रहा था रब कोई
यहाँ मिल गया है ।
दो दिलों को अपना
एक जहां मिल गया है ।
अब बस बेसब्र मिलन का
इन्तजार बाकी था ।
इन नजरों को बस तुम्हारा
दीदार बाकी था ।
खुशनुमा थी वो
इजहार की कहानी।
अब भी जी रही है
वहीं मेरी जिन्दगानी ।।

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