इक ख़्वाब सा दुनिया का-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इक ख़्वाब सा दुनिया का-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

इक ख़्वाब सा दुनिया का वजूद और अदम है ।
है दिल में मिरे जिस का येह सब जाह-ओ-हशम है ।
अंजामे-दो-आलम मिरे आगाज़ से कम है ।
आज़ाद हूं बेफ़िक्र हूं शादी है न ग़म है ।
सेर इतना हूं हर बेश मुझे कम नज़र आया ।
इक बून्द से बढ़ कर न मुझे यम नज़र आया ।

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