इक पुछदियां पंडति जोइसी-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

इक पुछदियां पंडति जोइसी-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

इक पुछदियां पंडति जोइसी,
कदि पिया मिलावा होइसी,
मिलि दरद विछोड़ा खोइसी ।१।

तप रहीसु माए मेरा जिय बले,
मै पीउ न देख्या दुइ नैन भरे ।१।रहाउ।

नित काग उडारां बनि रहां,
निस तारे गिणदी न सवां,
ज्युं लवे पपीहा त्युं लवां ।२।

सहु बिन कद सुख पावई,
ज्युं जल बिन मीन तड़फावई,
ज्युं बिछड़ी कूंज कुरलावयी ।३।

शेख़ शरफ़ न थीउ उतावला,
इकसे चोट न थींदे चावला,
मत भूलें बाबू रावला ।४।
(राग धनासरी)

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