इक़बाल-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

इक़बाल-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

आया हमारे देस में इक ख़ुशनवा फ़कीर
आया और अपनी धुन में ग़ज़लख़वां गुज़र गया
सुनसान राहें ख़ल्क से आबाद हो गईं
वीरान मयकदों का नसीबा संवर गया
थीं चन्द ही निगाहें जो उस तक पहुंच सकीं
पर उसका गीत सबके दिलों में उतर गया

अब दूर जा चुका है वो शाहे-गदानुमा
और फिर से अपने देस की राहें उदास हैं
चन्द इक को याद है कोई उसकी अदा-ए-ख़ास
दो इक निगाहें चन्द अज़ीज़ों के पास हैं
पर उसका गीत सबके दिलों में मुकीम है
और उसकी लय से सैंकड़ों लज़्ज़तशनास हैं

इस गीत के तमाम महासिन हैं ला-ज़वाल
इसका वफ़ूर, इसका ख़रोश इसका सोज़ो-साज़
ये गीत मिसले-शोला-ए-जव्वाल: तुन्दो-तेज़
इसकी लपक से बादे-फ़ना का जिगर गुदाज़
जैसे चिराग़ वहशते-सरसर से बे-ख़तर
या शमए-बज़म सुबह की आमद से बे-ख़बर

 

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