इंफ़िसाल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

इंफ़िसाल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

दोस्तो
तुम तो कंधों से ऊपर नज़र ही नहीं आ रहे हो
चलो
अपने चेहरे निदामत की अलमारियों से निकालो
इन्हें झाड़ कर गर्दनों पर रखो
तुम अधूरे नहीं हो तो पूरे दिखाई तो दो

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