इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो ॥
ओछे तप करि बाहुरि ऐबो ॥१॥
किआ मांगउ किछु थिरु नाही ॥
राम नाम रखु मन माही ॥१॥ रहाउ ॥
सोभा राज बिभै बडिआई ॥
अंति न काहू संग सहाई ॥२॥
पुत्र कलत्र लछमी माइआ ॥
इन ते कहु कवनै सुखु पाइआ ॥३॥
कहत कबीर अवर नही कामा ॥
हमरै मन धन राम को नामा ॥४॥४॥692॥

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