इंदीवर -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Indeevar 2

इंदीवर -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Indeevar 2

मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती,
सोना उगले, उगले हीरे मोती

बैलों के गले में जब घुंघरू
जीवन का राग सुनाते हैं
गम कोसों दूर हो जाता है
खुशियों के कँवल मुसकाते है
सुन के रहट की आवाजें
यूं लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के
दुल्हन की तरह हर खेत सजे
मेरे देश की धरती…

जब चलते हैं इस धरती पे हल
ममता अंगडाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजे इस माटी को
जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया
उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोइ नहीं
है सब पे माँ, उपकार तेरा
मेरे देश की धरती…

ये बाग़ है गौतम नानक का,
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक,
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से,
रंग लाल है लाल बहादूर से
रंग बना बसन्ती भगत सिंह,
रंग अमन का वीर जवाहर से
मेरे देश की धरती…

है प्रीत जहाँ की रीत सदा

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने
भारत ने मेरे भारत ने
दुनिया को तब गिनती आई
तारों की भाषा भारत ने
दुनिया को पहले सिखलाई

देता ना दशमलव भारत तो
यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था
धरती और चाँद की दूरी का
अंदाज़ लगाना मुश्किल था

सभ्यता जहाँ पहले आई
पहले जनमी है जहाँ पे कला
अपना भारत वो भारत है
जिसके पीछे संसार चला
संसार चला और आगे बढ़ा
ज्यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया
भगवान करे ये और बढ़े
बढ़ता ही रहे और फूले-फले

है प्रीत जहाँ की रीत सदा
मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

काले-गोरे का भेद नहीं
हर दिल से हमारा नाता है
कुछ और न आता हो हमको
हमें प्यार निभाना आता है
जिसे मान चुकी सारी दुनिया
मैं बात वही दोहराता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

जीते हो किसीने देश तो क्या
हमने तो दिलों को जीता है
जहाँ राम अभी तक है नर में
नारी में अभी तक सीता है
इतने पावन हैं लोग जहाँ
मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

इतनी ममता नदियों को भी
जहाँ माता कहके बुलाते है
इतना आदर इन्सान तो क्या
पत्थर भी पूजे जातें है
उस धरती पे मैंने जन्म लिया
ये सोच के मैं इतराता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए
प्यार से भी ज़रूरी कई काम हैं
प्यार सब कुछ नहीं ज़िंदगी के लिए

तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या
मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं
खुशबू आती रहे दूर से ही सही
सामने हो चमन कोई कम तो नहीं
चाँद मिलता नहीं सबको सँसार में
है दिया ही बहुत रोशनी के लिए

कितनी हसरत से तकती हैं कलियाँ तुम्हें
क्यूँ बहारों को फिर से बुलाते नहीं
एक दुनिया उजड़ ही गई है तो क्या
दूसरा तुम जहां क्यूँ बसाते नहीं
दिल ना चाहे भी तो साथ संसार के
चलना पड़ता है सब की खुशी के लिए

ओहरे ताल मिले नदी के जल में

ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में

सूरज को धरती तरसे
धरती को चंद्रमा
पानी में सीप जैसे
प्यासी हर आत्मा
प्यासी हर आत्मा
ओ मित्वा रे ए ए ए
पानी में सीप जैसे
प्यासी हर आत्मा
बूंद छुपी किस बादल में
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में

अंजाने होठो पर क्यू?
पहचाने गीत है
पहचाने गीत है
कल तक जो बेगाने थे
जन्मों के मीत है
जन्मों के मीत है
ओ मित्वा रे ए ए ए
कल तक जो बेगाने थे
जन्मों के मीत है
क्या होगा कौनसे पल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में

वक़्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते

वक़्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते
हम भी ग़ैरों की तरह आप को प्यारे होते
वक़्त करता जो वफ़ा …

अपनी तक़दीर में पहले ही कूछ तो ग़म हैं
और कुछ आप की फ़ितरत में वफ़ा भी कम है
वरन जीती हुई बाज़ी तो ना हारे होते
वक़्त करता जो वफ़ा …

हम भी प्यासे हैं ये साक़ी को बता भी न सके
सामने जाम था और जाम उठा भी न सके
काश ग़ैरते-महफ़िल के न मारे होते
वक़्त करता जो वफ़ा …

दम घुटा जाता है सीने में फिर भी ज़िंदा हैं
तुम से क्या हम तो ज़िंदगी से भी शर्मिन्दा हैं
मर ही जाते जो न यादों के सहारे होते
वक़्त करता जो वफ़ा …

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब …

अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जाएंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम, कंवल जितने चाहोगी खिल जाएंगे
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे, जवानी भी दामन छुड़ाने लगे
तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा सर झुका है झुका ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब …

कोई शर्त होती नहीं प्यार में, मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
नज़र में सितारे जो चमके ज़रा, बुझाने लगीं आरती का दिया
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो, अंधेरों में अपने ही घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिये, ये दीपक जला है जला ही रहेगा
तुम्हारे लिये, कोई जब …

हम छोड़ चले हैं महफ़िल को

हम छोड़ चले हैं महफ़िल को
याद आए कभी तो मत रोना
इस दिल को तसल्ली दे देना
घबराए कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को …

एक ख़्वाब सा देखा था हमने
जब आँख खुली वो टूट गया
ये प्यार अगर सपना बनकर
तड़पाये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को …

तुम मेरे ख़यालों में खोकर
बरबाद न करना जीवन को
जब कोई सहेली बात तुम्हें
समझाये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को …

जीवन के सफ़र में तनहाई
मुझको तो न ज़िन्दा छोड़ेगी
मरने की खबर ऐ जान-ए-जिगर
मिल जाए कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को ….

ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र

ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ज़िंदगी को बहुत प्यार हमने दिया
मौत से भी मोहब्बत निभाएँगे हम
रोते रोते ज़माने में आए मगर
हंसते हंसते ज़माने से जाएँगे हम
जाएँगे पर किधर है किसे ये खबर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं
जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
जिनको खिलने से पहले फ़िज़ा खा गई
है परेशान नज़र तक गये चारागार
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नही कोई जाना नहीं

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या
कोई किसी का नहीं ये झूठे
नाते हैं नातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या

होगा मसीहा…
होगा मसीहा सामने तेरे
फिर भी न तू बच पायेगा
तेरा अपना…
तेरा अपना खून ही आखिर
तुझको आग लगाएगा
आसमान के…
आसमान के उड़ने वाले
मिट्टी में मिल लगाएगा
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या

सुख में तेरे…
सुख में तेरे साथ चलेंगे
दुख में सब मुख मोड़ेंगे
दुनिया वाले…
दुनिया वाले तेरे बनकर
तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते है…
देते हैं भगवान को धोखा
इन्सां को क्या छोड़ेंगे
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या

ओ बाबुल प्यारे

ओ बाबुल प्यारे
ओ बाबुल प्यारे
ओ रोए पायल की छम-छम
ओ सिसके सांसों की सरगम
ओ निसदिन तुझे पुकारे मन हो
ओ बाबुल प्यारे

तेरी ही बाहों में बचपन खेला
खिलती गयी जिंदगानी
ओ…
तेरी ही बाहों में बचपन खेला
खिलती गयी जिंदगानी
आंधी ऐसी फिर चली टूटी डाली से कली
माली माली के उजड़ा चमन हो
ओ बाबुल प्यारे
ओ रोए पायल की छम-छम
ओ सिसके सांसों की सरगम
ओ निसदिन तुझे पुकारे मन हो

कैसे अभागन बने सुहागन
कौन बैठाए डोली
कैसे अभागन बने सुहागन
कौन बैठाए डोली
कैसे आएगी बारात
कैसे होंगे पीले हाथ
कैसे बेटी बनेगी दुल्हन हो
ओ बाबुल प्यारे
ओ रोए पायल की छम-छम
ओ सिसके सांसों की सरगम
ओ निसदिन तुझे पुकारे मन हो
ओ बाबुल प्यारे

जनक ने कैसे त्याग दिया है
अपनी ही जानकी को
बेटी भटके राहों में
माता डूबी आहों में
बेटी भटके राहों में
माता डूबी आहों में
तरसे तेरे दरस को नयन हो
ओ बाबुल प्यारे
ओ रोए पायल की छम-छम
ओ सिसके सांसों की सरगम
ओ निसदिन तुझे पुकारे मन हो

जिस दिल में बसा था प्यार तेरा

जिस दिल में बसा था प्यार तेरा
उस दिल को कभी का तोड़ दिया, हाय, तोड़ दिया
बदनाम न होने देंगे तुझे
तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा

जब याद कभी तुम आओगे
समझेंगे तुम्हें चाहा ही नहीं
राहों में अगर मिल जाओगे
सोचेंगे तुम्हें देखा ही नहीं
जो दर पे तुम्हारे जाती थीं
उन राहों को हमने छोड़ दिया हाय, छोड़ दिया
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा

हम कौन किसी के होते हैं
कोई हमको याद करेगा क्यूं
अपने दो आंसू भी हम पर
कोई बरबाद करेगा क्यूं –
उस मांझी को भी गिला हमसे
मंझधार में जिसने छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा …

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