इंतज़ार-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

इंतज़ार-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

गोधूलि वेला में पेड़
इंतजार करते हैं
चिड़ियों की वापसी का

खूंटे इंतजार करते हैं
धूल उड़ाती गायों के बंधने का

और घर की देहरी पर
अटकी तुम्हारी दोनों आंखें

बड़ी बेसब्री से
इंतजार करती हैं मेरे लौटने का

किसी भी लिपि में
वापस लौटने की क्रिया
अत्यंत आह्लादकारी होती है।

 

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