आ ही जाती है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

आ ही जाती है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

आ ही जाती है मगर फिर भी मेरे दर्द की याद
गरचे है तर्के-मोहब्बत में भी आराम बहुत

और भी काम है दुनियाँ में ग़में-उल्फत को
उसकी याद अच्छी नहीं ऐ दिले-नाकाम बहुत

ये भी साक़ी बस इक अंदाजे-सियहमस्ती थी
कर चुके तौबा बहुत,तोड़ चुके जाम बहुत

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