आ गई आँधी गगन में-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आ गई आँधी गगन में-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आ गई आँधी गगन में।

ये नहीं दिखते जहां पर,
धूल-कण पहले वहां पर-
देख लो, छा गया कैसा काल अंधड़ एक क्षण में।
आ गई आँधी गगन में।

पेड़ जड़ से टूट गिरते,
और सदन अटूट गिरते,
किन्तु नभ में उड़ रहा वह कौन खग जग के पतन में?
आ गई आँधी गगन में।

दो बटोही सो रहे थे-
तले सुख से, एक तरु के,
गिर रहा वह पेड़ उन पर आ रहे आंसू नयन में।
आ गई आँधी गगन में।

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