आसान नहीं लक्ष्मण की उर्मिला होना-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

आसान नहीं लक्ष्मण की उर्मिला होना-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

आसान नहीं है
प्रेम में पगे खतों की प्रतीक्षा भी न करना
आसान नहीं है
प्रेम में विलग हो, प्रेम में व्याकुल रहना
आसान नहीं है
प्रेम को पूज्य मान उसकी इच्छा को शिरोधार्य करना
आसान नहीं है
अपने संग हुए अन्याय पर प्रश्नचिन्ह भी ना लगाना

हाँ कठिन है मन की व्यथा को, कथा न बनने देना
कठिन है नितांत एकल रहकर मन को छुब्ध न रहने देना

बहुत ही कठिन है प्रेम में रहकर,
प्रेम से दूर रह पाना
और शायद कठिन ही नहीं दुष्कर है
बिना किसी दोष के दंड पाना

बड़ा ही कठिन है ये पड़ाव
महसूस ना होने देना हाव भाव

हाँ आसान नहीं है,
असहमत होने पर भी
सहमति में सिर हिला देना

आसान नहीं है किसी का भी
प्रेम में ‘लक्ष्मण की उर्मिला’ होना..!!

 

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