आशीष*-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

आशीष*-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

 

कितना कुछ बदल देती है आशीष
फीका लगता सूरज गाढ़ा हो जाता है।
चंद्रमा आकाश से उतर कर
अकेला मामा नहीं, तारों सहित
पूरा ननिहाल बन जाता है।

वर्षा की बूँदें अर्थ बदलतीं।
रहमत बन जाते हैं जल कण।
आशाओं के बौर
दुघ्धे दानों में बदल जाते हैं।
बेटी माँ बन जाती है
और पुत्र पिता।
कितना कुछ बदल जाता है
एक आशीष के साथ।

ऋतुएँ सुरीली
बहारें महमहाती।
हवाएँ बहतीं इत्र भीगी।
वक्त की रफ़्तार बदल जाती है।
चाँद पर चलने की तरह
हल्के फुल्के कदम।
शहद कटोरी नाको नाक भर जाती है।
छोटी इलाइची घुलती है
साँसों में
एक आशीष के साथ
घर का सारा व्याकरण बदल जाता है।
गड्ढे भरते
टीले ढहते
समतल धरती पर चलना
अच्छा लगता है
एक आशीष के साथ।

घर की दीवारों में से
मुबारक आवाज़ें आतीं
शिरीष के पत्तों के
वंदनवार सजते।

द्वार पर लगे वृक्ष पर
चिड़ियाँ चहचहातीं सुबह सुबह
हमारी बेटी के साथ खेलने आई
सखियाँ सहेलियाँ लगतीं

कितना कुछ
बदल देती है आशीष
सबका भला माँगती है ज़बान।
कण कण शुक्राना करता
एक आशीष क्या का क्या कर देती है।

*25 सितम्बर 2018 को मेरी पौत्री के
जन्म की ख़बर मिलने पर।

 

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