आवहु भैणे तुसी मिलहु पिआरीआ-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आवहु भैणे तुसी मिलहु पिआरीआ-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आवहु भैणे तुसी मिलहु पिआरीआ ॥
जो मेरा प्रीतमु दसे तिस कै हउ वारीआ ॥
मिलि सतसंगति लधा हरि सजणु हउ सतिगुर विटहु घुमाईआ जीउ ॥१॥
जह जह देखा तह तह सुआमी ॥
तू घटि घटि रविआ अंतरजामी ॥
गुरि पूरै हरि नालि दिखालिआ हउ सतिगुर विटहु सद वारिआ जीउ ॥२॥
एको पवणु माटी सभ एका सभ एका जोति सबाईआ ॥
सभ इका जोति वरतै भिनि भिनि न रलई किसै दी रलाईआ ॥
गुर परसादी इकु नदरी आइआ हउ सतिगुर विटहु वताइआ जीउ ॥३॥
जनु नानकु बोलै अम्रित बाणी ॥
गुरसिखां कै मनि पिआरी भाणी ॥
उपदेसु करे गुरु सतिगुरु पूरा गुरु सतिगुरु परउपकारीआ जीउ ॥੪॥੭॥੯੬॥

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