आरती-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

आरती-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

आरति कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल गरजै महि काँपे । रोग सोग जाके सिमाँ न चांपे ॥
अंजनी-सुत महाबल-दायक । साधु संत पर सदा सहायक ॥
बांएँ भुजा सब असुर सँघारी । दहिन भुजा सब संत उबारी॥
लछिमन धरनि में मूर्छि पय्यो। पैठि पताल जमकातर तोय्यौ ॥१॥
आनि सजीवन प्रान उबाय्यो । मही सबन कै भुजा उपाय्यो ॥
गाढ़ परे कपि सुमिरौ तोहीं । होहु दयाल देहु जस मोहीं ॥
लंका कोट समुन्दर खाई । जात पवन सुत बार न लाई॥
लंक प्रजारि असुर सब मारयौ । राजा रामजि के काज सँवारयौ ॥
घंटा ताल झालरी बाजै । जग मग जोति अवधपुर छाजै ॥
जो हनुमानजि की आरति गावै । बसि बैकुंठ परम पद पावै ॥
लंक विधंस कियो रघुराई। रामानन्द (स्वामी) आरती गाई ॥
सुर नर मुनि सब करही आरती। जै जै जै हनुमान लाल की ॥२॥

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