आभास-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

आभास-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

तुमसे क्या छिपाऊं मन की बात
तुम तो मेरे मन की आरसी हो
विधु-विनोदिनी रजनी की रति हो
तुम गगन की रमणी जैसी हो

सोचता हूँ तुम्हे किताब की तरह पकड़ लूँ
शब्दों के तार बना मन में छिपा लूँ
गुनगुनाता रहूँ, प्रणय गीत की पंक्ति सा
और अधरों में आजीवन तुम्हे बसा लूँ

सुबह लगता, तुमसे कितनी दूर हुआ
कभी मेरे मन में भी झांक लिया करो
वह कल भी आस-पास ही है
इस निर्मोही समय से तो कभी डर जाया करो

तुम्हे शब्दों में संवारना सुखमय है
जिन्हें जी कर कुछ पल सो लेते हैं
जब तुम होती हो दूर कहीं
इस कविता पर ही आँखें भिगो लेते हैं

तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ
इस बात का तुम आभास कर लो
तुमसे ही जीवन है
इस सत्य को सांसों में भर लो

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