आभार-प्रदर्शन-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

आभार-प्रदर्शन-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

पेट को भोजन
और इच्छा को साधन
देने वाले ने क्या कम दिया !

प्रिये !
जन फिर भी असन्तुष्ट
कहते हैं, तुमने सुख-चैन हरा मेरा
मुझको ग़म दिया ।
सोचते नहीं हैं किन्तु—
–हृदय जिसने सहा दुख
सहना सिखाया
और अभिव्यक्ति की
नयी काव्य-शैली को जनम दिया
मेरे पास कहाँ से आया !

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