आप सबके लिए आपके लिए कोई नहीं-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

आप सबके लिए आपके लिए कोई नहीं-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

आप सबके लिए हैं
आपके लिए कोई नहीं।
सब को प्यार देना, सबका ख़्याल रखना
आपकी ज़िम्मेदारी।
आपसे प्यार..?
आपका ख़्याल..?
ख़ुद आप करें।
सब की ख़ुशी ही आपकी ख़ुशी
सब की तकलीफ़ आपका दर्द
आपकी ख़ुशी..?
आपकी तकलीफ़..?
ख़ुद आप ही सहें।
तन्हा ज़िन्दगी में बटोर कर मुस्कान
निभाते जाइए सारे रिश्ते
सबको आबाद करते
ख़ुद को ख़त्म होते देखिए
कैसे मुस्कुराती है ज़िन्दगी….!

 

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