आपे स्रिसटि उपाइदा पिआरा-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आपे स्रिसटि उपाइदा पिआरा-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आपे स्रिसटि उपाइदा पिआरा करि सूरजु चंदु चानाणु ॥
आपि निताणिआ ताणु है पिआरा आपि निमाणिआ माणु ॥
आपि दइआ करि रखदा पिआरा आपे सुघड़ु सुजाणु ॥१॥
मेरे मन जपि राम नामु नीसाणु ॥
सतसंगति मिलि धिआइ तू हरि हरि बहुड़ि न आवण जाणु ॥ रहाउ ॥
आपे ही गुण वरतदा पिआरा आपे ही परवाणु ॥
आपे बखस कराइदा पिआरा आपे सचु नीसाणु ॥
आपे हुकमि वरतदा पिआरा आपे ही फुरमाणु ॥२॥
आपे भगति भंडार है पिआरा आपे देवै दाणु ॥
आपे सेव कराइदा पिआरा आपि दिवावै माणु ॥
आपे ताड़ी लाइदा पिआरा आपे गुणी निधानु ॥३॥
आपे वडा आपि है पिआरा आपे ही परधाणु ॥
आपे कीमति पाइदा पिआरा आपे तुलु परवाणु ॥
आपे अतुलु तुलाइदा पिआरा जन नानक सद कुरबाणु ॥੪॥੫॥੬੦੬॥

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