आपे कंडा आपि तराजी-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आपे कंडा आपि तराजी-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

आपे कंडा आपि तराजी प्रभि आपे तोलि तोलाइआ ॥
आपे साहु आपे वणजारा आपे वणजु कराइआ ॥
आपे धरती साजीअनु पिआरै पिछै टंकु चड़ाइआ ॥१॥
मेरे मन हरि हरि धिआइ सुखु पाइआ ॥
हरि हरि नामु निधानु है पिआरा गुरि पूरै मीठा लाइआ ॥ रहाउ ॥
आपे धरती आपि जलु पिआरा आपे करे कराइआ ॥
आपे हुकमि वरतदा पिआरा जलु माटी बंधि रखाइआ ॥
आपे ही भउ पाइदा पिआरा बंनि बकरी सीहु हढाइआ ॥੨॥
आपे कासट आपि हरि पिआरा विचि कासट अगनि रखाइआ ॥
आपे ही आपि वरतदा पिआरा भै अगनि न सकै जलाइआ ॥
आपे मारि जीवाइदा पिआरा साह लैदे सभि लवाइआ ॥३॥
आपे ताणु दीबाणु है पिआरा आपे कारै लाइआ ॥
जिउ आपि चलाए तिउ चलीऐ पिआरे जिउ हरि प्रभ मेरे भाइआ ॥
आपे जंती जंतु है पिआरा जन नानक वजहि वजाइआ ॥੪॥੪॥੬੦੫-੬੦੬॥

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