आदमी है मौत से लाचार-प्राण गीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आदमी है मौत से लाचार-प्राण गीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आदमी है मौत से लाचार,
जी रहा है इसलिए संसार ॥

बूँद बनने के लिए बेसब्र घन है,
धूल चुनने के लिए व्याकुल सुमन है,
ढल रहा है चाँद निशि की बाहु में,
गोद में तम को लिए चंचल किरन है,
प्राण ! नश्वर है सकल श्रृंगार,
इसलिए सौन्दर्य है सुकुमार ।
आदमी है मौत से लाचार,
जी रहा है इसलिए संसार ॥

बज रही सरगम मरण की भू, गगन में,
है चिता की राख लिपटी हर चरण में,
हँस रहा हर डाल पर पतझर समय का,
एक विष की बूँद है सबके नयन में,
प्राण ! जीवन क्या, प्रणय क्या प्यार,
एक आंसू और एक अंगार ।
आदमी है मौत से लाचार,
जी रहा है इसलिए संसार ॥

धूल को मरघट सदा प्यारा लगा है,
अमृत को तन-घट सदा कारा लगा है,
चल रहा है गीत आँसू की डगर में,
मृत्यु से हारा सदा जीवन-समर में,
मत कहो रण-क्षेत्र है संसार,
हारता आया मनुज हर बार ।
आदमी है मौत से लाचार,
जी रहा है इसलिए संसार ॥

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