आत्मसमर्पण-देखना एक दिन-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

आत्मसमर्पण-देखना एक दिन-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

स्वतः तो फूल को झरना ही था
पर यदि वह
सौंप देता अपनी सुगन्ध
किन्हीं अँगुलियों को
तो सब कुछ बीत जाने पर भी
वे अँगुलियाँ
जब भी लिखतीं
लिखतीं फूल ही।

 

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