आज शाम को- कोयला और कवित्व -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar 

आज शाम को- कोयला और कवित्व -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar

 

आज शाम को फिर तुम आए उतर कहीं से मन में
बहुत देर कर आने वाले मनमौजी पाहुन–से।
लगा, प्राप्त कर तुम्हें गया भर सूनापन कमरे का,
गमक उठा एकान्त सुवासित कबरी के फूलों से।

लेकिन, सब को कौन खबर दे आया शुभागमन की?
फुनगी उठा लता वातायन पर से झाँक रही है,
बारम्बार पवन आता है परदे हटा–हटा कर।
और सितारे अन्तरिक्ष की चैखट लाँघ रहे हैं,
मानो, नभ से उतर यहाँ वे भी आनेवाले हों!

 

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