आज निश्चित हो-गीत-फ़रोश-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

आज निश्चित हो-गीत-फ़रोश-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

असि एक है
मसि एक हैँ
मसि चुनी मैंने,
असि चुनी तैंने;
मैं उतर लूँ क़लम से
मसि बिंदु,
तू बहा असि से
रकत के सिंधु,
मैं जगत बदलूँ
कि तू बदले जगत !
आज निश्चित हो
कि वह असि-धार
पैनी है
कि यह मसि-धार
पैनी है !
(सितंबर, 1937)

 

Leave a Reply