आज नकद कल उधार चलेगा-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

आज नकद कल उधार चलेगा-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

आज नकद कल उधार चलेगा।
अब ऐसे ही ये व्यापार चलेगा।

आज ही उधार नहीं करना है।
ऐसे तो नहीं कारोबार चलेगा।

आज ही उधार कर लिया तो।
कैसे अपना ये बेड़ा पार चलेगा।

नकदी के बिना भी कुछ नहीं।
फलता फूलता परिवार चलेगा।

नकदी आती जाती रहेगी तो।
ऐसे ही दो दो का चार चलेगा।

उधार देके क्यूं रोना उम्र भर।
फिर कभी न कोई प्रसार चलेगा।

लेन देन जरुरत है हम सबकी।
नकदी वाला अपना यार चलेगा।

एक नियम बना डाल काम में।
लिख बाद में न तकरार चलेगा।

सोहल नकदी का ही काम है।
नकदी के बिन न गुजार चलेगा।

 

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