आज तुम हो दूर कितने।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

आज तुम हो दूर कितने।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

इस जगत् से तोड़ नाते
चल दिये सबको रुलाते,
बन्द कर ली आँख सहसा, हुए हम मजबूर कितने।
आज तुम हो दूर कितने।

अश्रु में डूबा हुआ घर
चैन विधिना ने लिया हर,
छिन गया सर्वस्व पल में, हुए सपने चूर कितने।
आज तुम हो दूर कितने।

रह गये जग में अकेले
भाग्य कैसा खेल खेले?
विलग करने के अचानक फैसले थे क्रूर कितने।
आज तुम हो दूर कितने।

जिन्दगी वीरान लगती
आज निकली जान लगती,
दिल लगाने के लिए ये दर्द ही भरपूर कितने।
आज तुम हो दूर कितने।

 

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