आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq 

आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq

आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है
यह नहीं मालूम क्या कहवेंगे क्या कहने को है

देखे आईने बहुत, बिन ख़ाक़ हैं नासाफ़ सब
हैं कहाँ अहले-सफ़ा, अहले-सफ़ा कहने को हैं

दम-बदम रूक-रुक के है मुँह से निकल पड़ती ज़बाँ
वस्फ़ उसका कह चुके फ़व्वारे या कहने को है

देख ले तू पहुँचे किस आलम से किस आलम में है
नालाहाए-दिल हमारे नारसा कहने को है

बेसबब सूफ़ार उनके मुँह नहीं खोंलें है ‘ज़ौक़’
आये पैके-मर्ग पैग़ामे-क़ज़ा कहने को है

Leave a Reply