आग्रह-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta 

आग्रह-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

द्वार पर जो भी गुहार देता है।
वैष्णव है।

अयाचित अतिथि यह करपात्री है।
किंतु दाता है,
न जाओ किसी के स्वरूप पर।
स्वागत करो,
इस यायावरी, संकीर्तन करती हुई
असंग वैष्णवता का स्वागत करो
आँगन को बुहारो मत
कल ही
कीर्तन-पुरुष के ये पदचिह्न
द्वार के स्वस्तिक कहलाएँगे।

 

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