आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

बिखरी साँसें जोड़ बना संगीत मेरा
ले आँखों से अश्रु रचा है गीत मेरा,
दर्द भरे कुछ क्षण फिर से सुलगाऊँ
आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।

कुछ जीते, कुछ हारे पल भी जोड़े
दे न सकी तकदीर उसे हम छोड़े,
विचलित मन को चल थोड़ा समझाऊँ
आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।

मुट्ठी से गिरती रेतों को देखा
ऐसे ही बन मिटती जीवन – रेखा,
जीवन की गुत्थी को चल सुलझाऊँ
आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।

सुख तो है पर दुख का सागर गहरा
सुख झिलमिल, दुख देता अविकल पहरा,
सुख के रागों से तुझको भरमाऊँ
आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।

अधरों पर अब वो मुस्कान नहीं है
कंठों से फुटती मृदु – तान नहीं है,
तू मेरा, मैं तेरा दिल बहलाऊँ
आओ तुझको कोई गीत सुनाऊँ।

 

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