आइए हुजूर-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

आइए हुजूर-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

ओ हो हो हो
आइए हुजूर, आइए !
आ हा हा हा
बड़ी मुद्दत के बाद दिखाई पड़े हुजूर !
कहाँ ले चले हैं तशरीफ
खरामा खरामा चल रहे हैं
पैरों में क्या कोई तकलीफ है हुजूर ?
मैं हुजूर की क्या खिदमत करूँ, हुजूर !
हाय हाय हुजूर…
होय होय हुजूर…
मगर ये कया बात हुई हुजूर
कि हुजूर से चला नहीं जा रहा है अब
19.1.85 . पहले तो जब जब मुलाकात हुई
तब तब लगता था कि
हुजूर ने ‘चलज़ा’ तो सीखा ही नहीं
सरपट भागना ही-सीखा है हुजूर ने !
मगर अब ये क्‍या बात हुई हुजूर
कि, हुजूर से चला नहीं जा रहा है…

5.3.79

Leave a Reply