आँसू जब सम्मानित होंगे-वंशीवट सूना है -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आँसू जब सम्मानित होंगे-वंशीवट सूना है -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

आँसू जब सम्मानित होंगे मुझको याद किया जाएगा।
जहाँ प्रेम का चर्चा होगा मेरा नाम लिया जाएगा।।

मान-पत्र मैं नहीं लिख सका
राजभवन के सम्मानों का
मैं तो आश़िक रहा जनम से
सुन्दरता के दीवानों का
लेकिन था मालूम नहीं ये
केवल इस ग़लती के कारण
सारी उम्र भटकने वाला
मुझको शाप दिया जाएगा।
आँसू जब सम्मानित होंगे।

खिलने को तैयार नहीं थी
तुलसी भी जिनके आँगन में
मैंने भर-भर दिए सितारे
उनके मटमैले दामन में
पीड़ा के संग रास रचाया
आँख भरी तो झूमके गाया
जैसे मैं जी लिया किसी से
क्या इस तरह जिया जाएगा।
आँसू जब सम्मानित होंगे।

काज़ल और कटाक्षों पर तो
रीझ रही थी दुनियाँ सारी
मैंने किन्तु बरसने वाली
आँखों की आरती उतारी
रंग उड़ गए अब सतरंगी
तार तार हर साँस हो गई
फटा हुआ यह कुर्ता अब तो
ज्यादा नहीं सिया जाएगा।
आँसू जब सम्मानित होंगे।

जब भी कोई सपना टूटा
मेरी आँख वहाँ बरसी है
तड़पा हूँ मैं जब भी कोई
मछली पानी को तरसी है,
गीत दर्द का पहला बेटा
दुख है उसका खेल खिलौना
कविता तब मीरा होगी
जब हँसकर ज़हर पिया जाएगा।
आँसू जब सम्मानित होंगे।

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