आँसुओं को गिरने दिया जाए -कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

आँसुओं को गिरने दिया जाए -कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

कभी कभी बिना किसी
प्रत्यक्ष सुख या दुख के
आंसू गिराना..
जीवन के लिए उतना ही
जरूरी हो जाता है
जितना कि सांस लेना

सांसों के रुक जाने से
मृत्यु होती है,
यह शाश्वत नियम है
और इसे कहते हैं प्राकृतिक मृत्यु
किंतु आंसुओं को
ना गिरने देने से
जो मृत्यु होगी,
वह कहलाएगी ‘अप्राकृतिक’

मृत्यु दोनों ही में होगी
तो क्यों न फिर
जीवन भर इस शरीर ने
जिस प्रकृति की उपेक्षा की
मृत्यु समय के लिए तो
कम से कम, उसका संग
पूरे मन से किया जाये

तो चलो फिर..
शेष बची सांसो के
जीवित रहने के लिए
आँखों को उनकी खुद्दारी से
नाउम्मीद किया जाए
बिना किसी प्रत्यक्ष
सुख या दुख के
आंसुओं को
सहजता से
गिरने दिया जाए..!!

 

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