आँखों में सावन छलका हुआ है -वादा-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

आँखों में सावन छलका हुआ है -वादा-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

 

आँखों में सावन छलका हुआ है
आंसू है कोई अटका हुआ है

आँखों की हिचकी रूकती नहीं है
रोने से कब दिल हल्का हुआ है

सीने में टूटी है चीज कोई
खामोश से एक खटका हुआ है

चारों तरफ तू, बस तू ही तू है
मुझसे ज़ियादा भटका हुआ है

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