आँखें भीग जाती हैं-डॉ. अमरजीत टांडा-Dr. Amarjit Tanda -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

आँखें भीग जाती हैं-डॉ. अमरजीत टांडा-Dr. Amarjit Tanda -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

आँखें भीग जाती हैं
जब भी घर छोड़ता हूँ

किसी का घर न छूटे
घर छूटे टूटते हैं सहारे
लोगो कभी घर न छोड़ना
घर के बाद
एक अंबर ही रह जाती है छत
तू याद करेगी
ज़ुल्फ़ों सी काली रात को
सूरज होगा तप्त
मगर सर पे और कोई साया न होगा
आँखों को छुपा कर रख
तू रात चौहदवीं की
तेरे मुख जैसा हीरा
किसी बाज़ार में न होगा

जाना है तो जरा सोच कर निकलना
मेरे घर से ऊंचा दर नहीं मिलेगा
न जा इस महफ़िल को छोड़ कर
कल कोई शाम में तेरा गीत नहीं होगा
आँसू ही होंगे पास बैठे तेरे
और आँखों में एक सपना मेरा ही होगा
एक सपना मिला है रात को
मिट न जाए
संभाल कर रख
इस आस्मां में कोई सितारा तेरा न होगा
ढूँढ ले खोये हुए बिखरे हुए आँसू
किसी सुबह पे तेरा
कभी मेरे बिन नाम नहीं होगा

तू मिकनतिस बन
मैं लोहा ही अच्छा हूँ
खींच ले गई तू मुझे
लोहा इतना
दिल से कमजोर नहीं होता
और नही इतना ख़राब

मैं ही सिंगारता हूँ सभी ईमारतों को
घर है ये

घर है ये
मेरी यादों में वसा
इस में बहुत मालिक आए
और चल दिए

इस की दीवार के साथ
एक मजलिस लगती थी
सूरज देता था सभी को घूप
सोने जैसी कोसी कोसी

गाँव वाले आते
बातें करते- सरगोशियाँ जैसी चुगली
निंदा साज़िशें,
एक अखवार सी छपती

नन्हे मुन्ने खेलते
छोटी छोटी लड़ाई झगड़ा होता मिटता
कोई गाता कोई रोता
दीवार सभी कुछ सुनती

पल पलकें झपकते
बुलाता किसी को!
गाँव के घरों में से धुएं निकलते
मक्की की रोटी के पकने की आवाज
साग के तड़कने की महक आती
दरवाजे खिड़कियाँ खुलतीं
दरों पर कोई भिखारी आता

अब वोही घर खाली पड़ा है
कबूतर चमगादड़ खेल रहे हैं
वहां दीवार सूनी सी बैठी है
मुझे याद करती रहती हैं
गाँव वाले बातें करते हैं हमारी

घर खड़ा इंतज़ार कर रहा है
मुझे,मेरे पुरखों को

गली बह रही है
कदम कदम गुजर रहा है वहां से
घर मेरे दिल में वसा है
मेरे से बातें करता
अनेक सवाल पूछता
कि कहाँ चले गए हो मुझे छोड़ कर

कहाँ गया तेरा प्यार
और तेरी मेरी यारी का परचम

 

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