अश्रु-विसर्जन -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

 अश्रु-विसर्जन -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

देख कर भाल गुलाल-विहीन
चूर होता होली का चाव;
खिन्न हो मैंने किया सवाल
कहाँ वह गया रँगीला भाव?
चुप रही, सकी नहीं कुछ बोल,
हो गये दोनों लोचन लाल;
चौंक कर लिया कलेजा थाम,
दिया आँखों ने आँसू डाल।

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