अश्आर-तारिक़ अज़ीम तनहा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Tariq Azeem Tanha

अश्आर-तारिक़ अज़ीम तनहा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Tariq Azeem Tanha

 
मैदाने-हश्र को भूल गए हम मशरूफ होकर,
इस जिंदगी को मशरूफियत में ना गुज़ारो!

अब अपने कदमो पे भी यकीन ना रहा मुझे,
उतरा हूँ सीढ़ियों से तो दीवार का सहारा लेकर!

मिरी दास्ताने-महब्बत इतनी भी तवील नहीं,
आगाज़ उसकी नज़र से है इंतेहा जफ़ा पे बस!

बोझ ना जान ‘तन्हा’ गर लड़की हुई पैदा,
बस इतना जान ले की खुदा की रहमत है!

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