अशआर से मुर्दों को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

अशआर से मुर्दों को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

अशआर से मुर्दों को भी ज़िन्दा किया मैंने ।
कितने ही मरीज़ों को मसीहा किया मैंने ।
उर्दू-ए-मुअल्ला को मुजल्ला किया मैंने ।
नापैद था जो रंग वुह पैदा किया मैंने ।
तहसीं लिया करता हूं टूटे हुए दिल की ।
बस इश्क के मारे हुए लूटे हुए दिल की ।

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