अल्मिया-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

अल्मिया-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

किस तमन्ना से ये चाहा था कि इक रोज़ तुझे
साथ अपने लिए उस शहर को जाऊँगा जिसे
मुझको छोड़े हुए,भूले हुए इक उम्र हुई

हाय वो शहर कि जो मेरा वतन है फिर भी
उसकी मानूस फ़ज़ाओं से रहा बेग़ाना
मेरा दिल मेरे ख़्यालों की तरह दीवाना

आज हालात का ये तंज़े-जिगरसोज़ तो देख
तू मिरे शह्र के इक हुजल-ए-ज़र्रीं में मकीं
और मैं परदेस में जाँदाद-ए-यक-नाने-जवीं

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