अलह अगम खुदाई बंदे-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

अलह अगम खुदाई बंदे-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

अलह अगम खुदाई बंदे ॥
छोडि खिआल दुनीआ के धंधे ॥
होइ पै खाक फकीर मुसाफरु इहु दरवेसु कबूलु दरा ॥१॥
सचु निवाज यकीन मुसला ॥
मनसा मारि निवारिहु आसा ॥
देह मसीति मनु मउलाणा कलम खुदाई पाकु खरा ॥२॥
सरा सरीअति ले कमावहु ॥
तरीकति तरक खोजि टोलावहु ॥
मारफति मनु मारहु अबदाला मिलहु हकीकति जितु फिरि न मरा ॥३॥
कुराणु कतेब दिल माहि कमाही ॥
दस अउरात रखहु बद राही ॥
पंच मरद सिदकि ले बाधहु खैरि सबूरी कबूल परा ॥४॥
मका मिहर रोजा पै खाका ॥
भिसतु पीर लफज कमाइ अंदाजा ॥
हूर नूर मुसकु खुदाइआ बंदगी अलह आला हुजरा ॥5॥
सचु कमावै सोई काजी ॥
जो दिलु सोधै सोई हाजी ॥
सो मुला मलऊन निवारै सो दरवेसु जिसु सिफति धरा ॥६॥
सभे वखत सभे करि वेला ॥
खालकु यादि दिलै महि मउला ॥
तसबी यादि करहु दस मरदनु सुंनति सीलु बंधानि बरा ॥७॥
दिल महि जानहु सभ फिलहाला ॥
खिलखाना बिरादर हमू जंजाला ॥
मीर मलक उमरे फानाइआ एक मुकाम खुदाइ दरा ॥८॥
अवलि सिफति दूजी साबूरी ॥
तीजै हलेमी चउथै खैरी ॥
पंजवै पंजे इकतु मुकामै एहि पंजि वखत तेरे अपरपरा ॥९॥
सगली जानि करहु मउदीफा ॥
बद अमल छोडि करहु हथि कूजा ॥
खुदाइ एकु बुझि देवहु बांगां बुरगू बरखुरदार खरा ॥१०॥
हकु हलालु बखोरहु खाणा ॥
दिल दरीआउ धोवहु मैलाणा ॥
पीरु पछाणै भिसती सोई अजराईलु न दोज ठरा ॥११॥
काइआ किरदार अउरत यकीना ॥
रंग तमासे माणि हकीना ॥
नापाक पाकु करि हदूरि हदीसा साबत सूरति दसतार सिरा ॥१२॥
मुसलमाणु मोम दिलि होवै ॥
अंतर की मलु दिल ते धोवै ॥
दुनीआ रंग न आवै नेड़ै जिउ कुसम पाटु घिउ पाकु हरा ॥१३॥
जा कउ मिहर मिहर मिहरवाना ॥
सोई मरदु मरदु मरदाना ॥
सोई सेखु मसाइकु हाजी सो बंदा जिसु नजरि नरा ॥१४॥
कुदरति कादर करण करीमा ॥
सिफति मुहबति अथाह रहीमा ॥
हकु हुकमु सचु खुदाइआ बुझि नानक बंदि खलास तरा ॥15॥3॥12॥1083॥

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