अलस रस-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

अलस रस-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

जैसे दर्द चला जाता है
ऐसे चला गया
उत्साह का एक मौसम

और हमने आराम की साँस ली
की अब थोड़े दिनों तक
हमारी सुबह-शामों की ख़बर
हम नहीं रखेंगे
दूसरे रखेंगे

हम केवल पड़े रहने का सुख
चखेंगे हौले–हल्के

दुःख की तरह तीव्र
उत्साह का मौसम
चला जो गया है!

 

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