अरबद नरबद धुंधूकारा-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

अरबद नरबद धुंधूकारा-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

अरबद नरबद धुंधूकारा ॥
धरणि न गगना हुकमु अपारा ॥
ना दिनु रैनि न चंदु न सूरजु सुंन समाधि लगाइदा ॥१॥
खाणी न बाणी पउण न पाणी ॥
ओपति खपति न आवण जाणी ॥
खंड पताल सपत नही सागर नदी न नीरु वहाइदा ॥२॥
ना तदि सुरगु मछु पइआला ॥
दोजकु भिसतु नही खै काला ॥
नरकु सुरगु नही जमणु मरणा ना को आइ न जाइदा ॥३॥
ब्रहमा बिसनु महेसु न कोई ॥
अवरु न दीसै एको सोई ॥
नारि पुरखु नही जाति न जनमा ना को दुखु सुखु पाइदा ॥४॥
ना तदि जती सती बनवासी ॥
ना तदि सिध साधिक सुखवासी ॥
जोगी जंगम भेखु न कोई ना को नाथु कहाइदा ॥५॥
जप तप संजम ना ब्रत पूजा ॥
ना को आखि वखाणै दूजा ॥
आपे आपि उपाइ विगसै आपे कीमति पाइदा ॥६॥
ना सुचि संजमु तुलसी माला ॥
गोपी कानु न गऊ गोआला ॥
तंतु मंतु पाखंडु न कोई ना को वंसु वजाइदा ॥७॥
करम धरम नही माइआ माखी ॥
जाति जनमु नही दीसै आखी ॥
ममता जालु कालु नही माथै ना को किसै धिआइदा ॥८॥
निंदु बिंदु नही जीउ न जिंदो ॥
ना तदि गोरखु ना माछिंदो ॥
ना तदि गिआनु धिआनु कुल ओपति ना को गणत गणाइदा ॥९॥
वरन भेख नही ब्रहमण खत्री ॥
देउ न देहुरा गऊ गाइत्री ॥
होम जग नही तीरथि नावणु ना को पूजा लाइदा ॥१०॥
ना को मुला ना को काजी ॥
ना को सेखु मसाइकु हाजी ॥
रईअति राउ न हउमै दुनीआ ना को कहणु कहाइदा ॥११॥
भाउ न भगती ना सिव सकती ॥
साजनु मीतु बिंदु नही रकती ॥
आपे साहु आपे वणजारा साचे एहो भाइदा ॥१२॥
बेद कतेब न सिम्रिति सासत ॥
पाठ पुराण उदै नही आसत ॥
कहता बकता आपि अगोचरु आपे अलखु लखाइदा ॥१३॥
जा तिसु भाणा ता जगतु उपाइआ ॥
बाझु कला आडाणु रहाइआ ॥
ब्रहमा बिसनु महेसु उपाए माइआ मोहु वधाइदा ॥१४॥
विरले कउ गुरि सबदु सुणाइआ ॥
करि करि देखै हुकमु सबाइआ ॥
खंड ब्रहमंड पाताल अर्मभे गुपतहु परगटी आइदा ॥१५॥
ता का अंतु न जाणै कोई ॥
पूरे गुर ते सोझी होई ॥
नानक साचि रते बिसमादी बिसम भए गुण गाइदा ॥१६॥३॥१५॥(1035)॥

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