अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि ॥
मती मरणु विसारिआ खुसी कीती दिन चारि ॥
सचु मिलिआ तिन सोफीआ राखण कउ दरवारु ॥१॥
नानक साचे कउ सचु जाणु ॥
जितु सेविऐ सुखु पाईऐ तेरी दरगह चलै माणु ॥१॥ रहाउ ॥
सचु सरा गुड़ बाहरा जिसु विचि सचा नाउ ॥
सुणहि वखाणहि जेतड़े हउ तिन बलिहारै जाउ ॥
ता मनु खीवा जाणीऐ जा महली पाए थाउ ॥२॥
नाउ नीरु चंगिआईआ सतु परमलु तनि वासु ॥
ता मुखु होवै उजला लख दाती इक दाति ॥
दूख तिसै पहि आखीअहि सूख जिसै ही पासि ॥३॥
सो किउ मनहु विसारीऐ जा के जीअ पराण ॥
तिसु विणु सभु अपवित्रु है जेता पैनणु खाणु ॥
होरि गलां सभि कूड़ीआ तुधु भावै परवाणु ॥४॥५॥(15)॥

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